Journey of NAGA SADHU 

यह सफ़र इतनी असहनीय, श्रमसाध्य, कठोर और कठिन है कि भौतिक व्यक्ति का नागा साधु बनना लगभग असंभव है। दुनिया भर में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली सेना नागा साधुओं के प्रशिक्षण और योगिक प्रक्रिया से प्रेरित है, लेकिन फिर भी इसकी तुलना उन असहनीय परिस्थितियों से

नहीं की जा सकती जिनसे नागा साधु को गुजरना पड़ता है। यह 2 या 3 साल का व्यायाम नहीं है, लेकिन कम से कम एक दशक लगता है, कुछ मामलों में नागा साधु बनने में 20 से 30 साल लगते हैं। आइए एक नागा साधु को नागा पद प्राप्त करने से पहले गहन प्रक्रिया की जाँच करें:

जांच: जब भी कोई व्यक्ति अपने जीवन को नागा के रूप में आगे बढ़ाने में रुचि दिखाता है। अखाडा उसे आसानी से अंदर आने नहीं देता।अखाडा उचित परिश्रम के साथ उस व्यक्ति की पृष्ठभूमि की जांच करता है। यह सुनिश्चित करने के बाद कि वह व्यक्ति अपना जीवन बदलने का इच्छुक है, उसे अखाड़े में प्रवेश

होने देता है।
बाद में, व्यक्ति को ब्रह्मचर्य प्राप्त करने की अपनी क्षमता निर्धारित करने के लिए परीक्षणों की एक श्रृंखला से गुजरना पड़ता है – इस परीक्षण की अवधि 6 महीने से 12 वर्ष तक। मूल्यांकन के बाद, व्यक्ति को प्रशिक्षण के अगले स्तर की अनुमति दी जाती है।

महापुरुष: ब्रह्मचर्य की परीक्षा पास करने के बाद, व्यक्ति को महापुरुष बनाने के लिए अगले स्तर पर लाया जाता है। इस स्तर पर, साधक के पास 5 गुरु हैं। ये गुरु हैं पंच परमेश्वर (शिव,विष्णु, शक्ति,सूर्य और गणेश)। साधक को राख, रुद्राक्ष और अन्य आध्यात्मिक चीजें दी जाती हैं।

अवधूत: महापुरुष बनने के बाद साधक को अवधूत बनाया जाता है। अवधूत एक ऐसे मुकाम पर पहुंच रहे हैं, जो सभी सांसारिक आसक्तियों और चिंताओं से परे है।

मुंडन- बालों को साधक के सिर से हटा दिया जाता है। मुंडन के बाद, उसे वैदिक संस्कारों का पालन करते हुए खुद का पिंड दान करना होता है।

साधक को परिवार और दुनिया के लिए मृत माना जाता है। नागा की एकमात्र जिम्मेदारी अब सनातन धर्म और वैदिक परंपरा की रक्षा करना है।

फलस का नष्ट होना: यह एक यातनापूर्ण और असहनीय अवस्था है। इस प्रक्रिया में, अखाड़े के झंडे के नीचे नागा को 24 घंटे तक बिना भोजन के खड़ा रहना पड़ता है,

इन सभी घंटों के लिए उसके कंधे पर एक डंडा रखा जाता है और पानी के घड़े लटकाए जातें है।अखाडा के सदस्य नागाओं पर नजर रखते हैं, जबकि वह इस कठिन अभ्यास का अभ्यास करते हैं ताकि उनका फाल्स कमजोर हो जाए और इससे कामेच्छा पूरी तरह नष्ट हो जाए। अंत में, वैदिक मंत्रों के साथ धीरे-धीरे फल्लस

को पीटा जाता है, इससे फालूस निष्क्रिय हो जाता है। सभी गतिविधियाँ सनातन धर्म और भारत के लिए नागा को योद्दा (राजकुमारी) बनाने के लिए अखाडा भगवा ध्वज के तहत आयोजित की जाती हैं। यह अंतिम चरण है, अब साधक पूर्ण नागा है।

सवाल ये उठता है की इतनी कड़ी तपस्या क्यूँ? इसका एकमात्र

कारण है – मोक्ष की प्राप्ति। नागासाधु का मानना है कि इंसान संसार के मोह में पड़ कर कर्म करता है , तो जला डालो सारे कर्मों को। जो कुछ भी सुख दे शरीर को त्याग दो।कुछ ऐसा मत करो जिससे शरीर के लिए या किसी भी चीज़ के लिए मोह जन्मे। ये सोचकर की सायद इससे मोक्ष की प्राप्ति हो सके।

नागा साधु 

नागा साधु- धर्म और शौर्य के प्रतीक ।
संस्कृत में नागा का अर्थ पहाड़ होता है,और पहाड़ों के आसपास रहने वाले लोग पहाड़ी या नागा के नाम से जाने जाते हैं। नागा साधु हठयोग के सबसे अछे उदाहरण हैं।

नागा साधुओं का इतिहास बहुत पुराना है, इनके निशान मोहनजो-दड़ो के सिक्कों और

चित्रों में पाए जाते हैं जहाँ नागा साधुओं को पशुपतिनाथ रूप में भगवान शिव की पूजा करते हुए दिखाया गया है। भारत में रहने के दौरान एलेक्जेंडर और उनके सैनिक नागा साधुओं से भी मिले।

नागा स्थिति को प्राप्त करने की प्रक्रिया बहुत कठिन है और अभ्यास इतना कठिन है कि इसकी तुलना दुनिया भर में किसी भी सेना की सबसे कड़ी ट्रेनिंग से भी नहीं की जा सकती है।

प्राचीन काल के दौरान, नागा साधुओं को वैदिक-विरोधी आक्रमणकारियों से बुरी तरह से लड़ने के लिए सिखाया जाता था। नागा साधु मंदिरों और मठों की रक्षा करने के लिए तालवृक्ष, त्रिशूल, गदा, तेज दनुश और शस्त्र कौशल से लैस थे।

कई लोग मानते हैं की आदी शंकराचार्य ने युवा साधुओं पर जोर दिया कि वे सैनिक की तरह प्रशिक्षण लें। इसके लिए ऐसे मठ स्थापित किए गए, जहां सैन्य प्रशिक्षण दिया जाने लगा, ऐसे मठों को अखाड़ा कहा जाने लगा। शंकराचार्य ने अखाड़ों को सुझाव दिया कि

मठ, मंदिरों और श्रद्धालुओं की रक्षा के लिए जरूरत पडऩे पर शक्ति का प्रयोग करें। कालांतर में कई और अखाड़े अस्तित्व में आए।

इस तरह बाहरी आक्रमणों के उस दौर में इन अखाड़ों ने एक सुरक्षा कवच का काम किया। अखाड़ों का इतिहास वीरता से भरा है।

समय-समय पर अखाड़ों ने मुगलों और अंग्रेजों से मोर्चा लेने के लिए शस्त्र उठाया था। इन्होंने कभी जोधपुर को बाहरी आतंकियो से बचाया तो कभी 
अहमदशाह अब्दाली और औरंगज़ेब को हराया, तो कभी अंग्रेज़ जासूसों को मज़ा चखाया। औरंगज़ेब तो इनकी ताक़त देख के मंदिरो को तोड़ना बंद ही कर दिया था।

यही नहीं, नागा साधुओं ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

1920 में, गांधी ने उनकी मदद मांगी।तब इन्होंने ही ग्रामीण भारत के आम लोगों के बीच आग की तरह स्वतंत्रता आंदोलन का प्रसार किया। ग्रामीण लोग इन साधुओं को बहुत सम्मान के साथ मानते थे।

स्वतंत्रता के बाद,ऐसा माना जाता है की इन्होंने शस्त्र त्याग दिए और अब सिर्फ़ कुम्भ के समय ही इनके दर्शन हो पाते है । 

आज हालत ऐसे है की इनके अखाड़ों के साधुओं पर हमले हो रहे, इन्हें मारा जा रहा। 

जिनकी मिसालें दी जानी चाहिए,उनपे सियासत खेल कर इनकी तपस्या का मज़ाक़ बनाया जा रहा।

नागासाधु बनने के लिए निम्न प्रतिज्ञाएँ लेनी पड़ती है-

1) मजबूत ब्रह्मचर्य और तपस्या: एक व्यक्ति जो नागा साधु बनने में रुचि रखता है, उसे अपनी वासना,भावनाओं पर पूरा नियंत्रण होना चाहिए। ब्रह्मचर्य का पालन केवल भौतिक शरीर तक ही सीमित नहीं है बल्कि नैतिक मूल्यों पर भी आधारित है।

2) भगवान, लोगों और देश के लिए सेवा: एक व्यक्ति जो अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण प्राप्त करता है, उसका कोई फायदा नहीं है अगर वह भगवान, लोगों और देश से प्यार नहीं करता है। नागासाधु को ये मानकर इनकी सेवा करनी होती है।

3) अंतिम संस्कार: परिवार और समाज के लिए खुद को मृत मानते हुए

अपना अंतिम संस्कार करना बहुत ज़रूरी है। यह नागाओं की एक नई दुनिया में एक व्यक्ति के नए जन्म की तरह है। अंतिम संस्कार, पिंडदान और श्राद्ध व्यक्ति द्वारा स्वयं किए जाते हैं, परिवार के सदस्यों और दोस्तों के साथ उसके संबंध को त्यागते हैं। इसके बाद, गुरु उसे नया नाम और पहचान देता है।

4) वस्त्र त्याग: नागा साधु कपड़े नहीं पहन सकते।एक नागा साधु अपने शरीर को सजाने के लिए सांसारिक चीजों का उपयोग नहीं कर सकता है,वह केवल अपने शरीर को राख से रगड़ सकता है,जो उसका एकमात्र श्रृंगार है।

5) रुद्राक्ष धारण करना: एक नागा को अपनी गर्दन पर रुद्राक्ष माला पहननी होती है।

6) एक बार भोजन: एक नागा साधु दिन में केवल एक बार भोजन कर सकता है।नागा साधु भोजन के लिए अधिकतम सात घरों में भिक्षा ले सकते हैं, यदि इन सात घरों में से किसी में भी उन्हें भोजन नहीं दिया जाता है तो उन्हें दिन के लिए भूखा रहना पड़ता है।

7) धरती पर सोना: एक नागा केवल धरती पर ही सो सकता है,वह सोने के लिए खाट,पलंग या छटाई का इस्तेमाल नहीं कर सकता।हर नागा साधु को इस शर्त का पालन करना होता है।

8) गुरु मंत्र: दीक्षा प्राप्त करने के बाद, गुरु नागा को एक मंत्र देता है।उनका पूरा जीवन इस गुरुमंत्र के इर्द-गिर्द घूमता है।

उसे पूरी तरह से गुरु पर भरोसा करना चाहिए और उसे दिए गए मंत्र के साथ तपस्या करनी चाहिए।

9) एकांत जीवन: एक नागा साधु शहरों या घनी आबादी वाले शहरों में नहीं रह सकता है। उसे उन जगहों पर शरण लेनी होगी जो आम लोगों से बहुत दूर है 

Gold Mines 

We Indians are crazy about gold, specially girls. What if I told you our scientists have discovered a totally new kind of gold.

Scientists of Tata Institute of Fundamental Research has prepared a new material and named it as BLACK GOLD.

International media is covering it as key to future Before discussing about black gold, I will brief you a lil about nanotechnology. It has been seen that if we bring any material to a size of 10^-9 m to 10^-7 m, the properties of that material changes.

Any application which is drawn from that is called nanotechnology.

we all know that despite of being a very good conductor, gold doesn’t have a tendency to absorb or store heat.

Now what scientists did, is truly amazing. They used gold nanoparticles and rearranged its size and

gaps between them and found a new material which has unique properties such as capacity to absorb light and carbon dioxide. Gold does not have these properties, therefore ‘black gold’ is being called a new material. In appearance it is black, hence the name ‘black gold.

One of the most fascinating properties of the black gold is its ability to absorb the entire visible and near-infrared region of solar light. It does so because of inter-particle plasmonic coupling as well as heterogeneity in nanoparticle size. Black gold could also act as a

catalyst and could convert carbon dioxide into methane at atmospheric pressure and temperature using solar energy.

Just imagine If we develop an artificial tree with leaves made out of back gold, it can perform artificial photosynthesis, capturing carbon dioxide and converting

it into fuel and other useful chemicals. Truly amazing, I guess.

But thats not it, when researchers dispersed it into water and exposed the solution to light for one hour and the temperature of the solution was measured. The temperature of the solution with pure silica spheres

rose to 38 degrees while the ones with different concentrations of black gold rose to 67 to 88 degrees. The maximum increase in temperature was attributed creation of thermal hotspots due to the heterogeneity of the particle sizes as well as optimum inter- particle coupling.

In short, it can give us pollution free fuel ( methane), a pollution free environment by absorbing CO2, A solution to global warming, by absorbing heat it can reduce green house effects and a source to use solar energy more effectively. 

1996: सरकार और मीडिया का साधुओं के प्रति चरित्र ।

 1966 में लोकसभा चुनाव से पहले, इंदिरा गांधी ने चुनाव जीतने के लिए दो हिंदू संत, स्वामी करपात्री जी और आचार्य विनोबा भावे, का आशीर्वाद मांगा

Imageउन्होंने गाय और अन्य मवेशियों के संरक्षण के लिए अनुच्छेद 48 में भारतीय संविधान में निहित सिद्धांतों को लागू करने की शर्त पर इंदिरा गांधी को सफलता के लिए आशीर्वाद दिया।इंदिरा गांधी ने अपनी चुनावी रणनीति में मुख्य प्रचार बिंदुओं में से एक के रूप में गोहत्या प्रतिबंध को रखा।

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इसके कारण उन्हें हिंदू समूहों से बड़े पैमाने पर समर्थन मिला।अपनी जीत के बाद, इंदिरा हिंदू संतों से अपना वादा निभाने में विफल रहीं और गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने के लिए हिंदू संगठनों की बार-बार की गई दलीलों को नजरअंदाज किया। उस समय प्रतिदिन लगभग 15,000 गायों का वध किया जाता था।

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हताश हो कर, 7 नवंबर, 1966 को, जिसे गोपाष्टमी दिवस के भी नाम से जाना जाता है और हिंदू कैलेंडर के अनुसार गाय की पूजा करने के लिए सबसे पवित्र दिन माना जाता है, हिंदू संतों और गौ रक्षकों की भारी भीड़ ने गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने की मांग के लिए संसद के सामने धरना दिया।Image

कई हिंदू संतों ने उपवास किया और शांतिपूर्ण विरोध किया। आधिकारिक संख्या यह है कि 10,000 प्रदर्शनकारी एकत्र हुए, लेकिन अनौपचारिक संख्या में कहा गया कि 3-7 लाख भारतीय संसद के बाहर एकत्र हुए थे।

साधुओं की संख्या से घबरा कर सरकार ने उन निहत्थे साधुओं को गोली मारने का आदेश दे दिया।Image

तब पुलिस ने भीड़ पर गोलियां चलाईं, जिससे साधुओं की अंधाधुंध हत्या हुई।

इसके बाद, 48 घंटे का कर्फ्यू लगाया गया। उन 48 घंटो में क्या कुछ हुआ, आज तक ठीक से पता ना चला। 

पहले ख़बर ये आई की विरोध में 5000 से अधिक हिंदुओं का बेरहमी से कत्ल किया गया था, और कई अन्य घायल हुए थे।Image

शवों को तुरंत हटा दिया गया और फेंक दिया गया या आग में डाल दिया गया।
पर बाद में यह अनुमान लगाया गया कि 375 हिंदू मारे गए थे।अगर कुछ लोगों की माने तो सरकार ने दिल्ली के बाहरी इलाके में नरसंहार के सभी चश्मदीदों को हटाने के लिए अनुमानित 5000 बसों और सैन्य ट्रकों को तैनात किया,Image

ताकि नरसंहार की खबरें ना शामिल हों, और आसानी से उपलब्ध जानकारी का कोई स्रोत ना रहे। सरकार ने पत्रकारों और मीडिया के आउटलेट को इस घटना की कोई भी खबर प्रकाशित करने की अनुमति नहीं दी। एक पत्रकार, मन मोहन शर्मा ने फिर भी बाद में एक बयान दिया कि नरसंहार के सबूत भी सरकार द्वारा नष्टImage

कर दिए गए थे। सरकार ने मीडिया को स्पष्ट रूप से आदेश दिया था कि किसी भी व्यक्तिगत रिपोर्टिंग की अनुमति नहीं थी, और सरकार द्वारा केवल प्रेस विज्ञप्ति को प्रकाशित किया जाना था। 

घटनास्थल पर मौजूद तब के एक साधु ने एक इंटर्व्यू में कहा था की-Image

”बड़ी त्रासदी हो गई थी और सरकार के लिए इसे दबाना जरूरी था। ट्रक बुलाकर मृत, घायल, जिंदा-सभी को उसमें ठूंसा जाने लगा। जिन घायलों के बचने की संभावना थी, उनकी भी ट्रक में लाशों के नीचे दबकर मौत हो गई। हमें आखिरी समय तक पता ही नहीं चला कि सरकार ने उन लाशों को कहां ले जाकर फूंकImage

डाला या जमीन में दबा डाला। पूरे शहर में कफ्र्यू लागू कर दिया गया और संतों को तिहाड़ जेल में ठूंस दिया गया। केवल शंकराचार्य को छोड़ कर अन्य सभी संतों को तिहाड़ जेल में डाल दिया गया। करपात्री जी महाराज ने जेल से ही सत्याग्रह शुरू कर दिया। जेल उनके ओजस्वी भाषणों से गूंजने लगा।Image

उस समय जेल में करीब 50 हजार लोगों को ठूंसा गया था।”

लेकिन आज इस घटना को मीडिया के माध्यम से संसद भवन पर किए गए पहले हमले के रूप में जाना जाता है। 

दुख की बात ये है कि 54 साल बाद भी ना तो उन साधुओं को इंसाफ़ मिला ना ही अनुच्छेद 48 केंद्र में लागू है ।Image

Manusmriti – & its controversies 

NOTE- whatever, I’m writing is based on my understanding of manusmriti. My intention is not to hurt you.

What is Manu Smriti.
It is a book based on the lesson given by Manu to rishis.

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Many people would be aware that Manu, like Indra, is not the name of a person but a title that is passed on to different people from time to time (to be specific, after a Manvantar). To know more about time and manvantar, please read my following thread-Image

2. Many people claim that manusmriti is responsible for spreading casteism, that too based on ‘by birth’.

Well, if you look into the smaller picture and with closed mindset, yes it talks about the varna system, which many people interpret as caste system. 

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But,

In the bigger picture, it talks only about the varna system that too based on your karma (work)
And following verse from manusmriti proves it.

Manusmriti chapter 1, shloka 21—Image

3. Leftist will tell you the following shloka where it states that Brahma, gave birth to the Brahmins from his mouth, the Kshatriyas from his shoulders, the Vaishyas from his thighs and Shudras from his feet. But they forgot to mention the whole meaning of chapter 1, shloka- 31—Image

So, its clear that “for the welfare of the society the varna was created.”

Before proceeding further, we must understand the meaning of following shloka taken from Skanda Purana Vol.18 Book VI , Nagar Kanda , Chapter 239 , Verse 31-34—Image

4. People complain about the duties given to brahman, kshtriya, vaisy & shudra, which is mentioned in manusmriti chapter 1, shloka 91, which states that the work of shudra is to serve all the 3 varna—-Image

Now, to understand this, let us suppose that you own a company. You’ll hire mainly 3 kind of employees-

1Workers- they will do the job

2. Managers- they will assist the workers

3. guards- they will serve all the above 2 sections.

Similarly, the varna system was based on.Image

5. Leftist states that a shudra was meant to be punished harshly for his/her mistakes, but manusmriti chapter 8, shloka 336-337 states that “A brahman should be 128 times more guilty than the shudra for the same mistake which means more punishment should be given to brahman—Image

6. Leftist claim that, ‘A person who is born as shudra will be shudra throughout the life but, manusmriti clearly states that a person may get higher varna based on his karma & vice-versa. Chapter 9 verse 334 and chapter 10 verse 64—ImageImage

So, I guess now its clear that varna was based on karma, it was flexible. 

3 questions-

1. How varna system became the caste system, that too by birth?
2. Was manusmriti ever imposed on the society 
3. Should it be imposed in today’s world? 

According to Wikipedia, manusmriti was one of the first Sanskrit texts to have been translated into English in 1794, by Sir William Jones,and was used to formulate the Hindu law by the British govt. 

Many claim that British thought that like sariya, hindu too have book of law.Image

According to a report of the hindu- “About 200 years ago, the British rulers were said to have found that in Indian villages every man, woman and child knew how to read, write and do arithmetic. That surveys lies in an observation made by William Adam.Image

In his first report, he observed that there exist about 1,00,000 village schools in Bengal and Bihar around the 1830s.” 

It is clear that even villagers were educated. In other words, it is a tight slap to those who have spread the myth that “shudra were not allowed to study”.Image

The problem started when britishers closed our gurukuls and started their own education system. This was the time when caste was clearly mentioned and highlighted in the form. Eventually this made varna, as caste system, a permanent identity for the people.Image

Even Shashi Tharoor, during the launch of his book, an era of darkness states that British responsible for giving a final shape to the caste system. He said, “We had castes, we did not have the caste system. The British were the ones who had actually codified, entrenched andImage

classified our country and our people in the way that we have since then started self-defining ourselves in ways that the British did for us.”
He further said, “Caste had been much fuzzier, a much more fungible identity in the past.Image

In my opinion, It is true that we cannot import all of the original verses of Maharishi Manu to our contemporary pluralistic society (founded on democratic principles). However, there is much within “Manu Smriti” which can be studied and emulated.Image

Evidences of shree Ram and Ramayana 

On 12 September 2007, congress said in SUPREME COURT that there is no HISTORICAL evidences of Shree Ram and said, ‘Ram is a MYTHICAL character.


Really? Have a look-

1. There is government committee in Sri lanka named “Ramayana research committee” whose chairmen is Ashok kainth, and was formed to research specifically about ramayana. They claim that have found-

a) lord Hanuman footprints in Andhra pradesh and srilanka.

Similar foot prints have been found through out the asia.

b) In Ramayan, it is mentioned that the Ram Setu was built by Stones and these stone starts Floating on water by touch of Nala & Neel. Some such stones were scattered at Rameswaram during the Tsunami, these stones still

float on water. Many Geologist says RAMA Setu is built by natural process but failed to Provide enough proofs.

c) they have found Ashok Vatika in Sri Lanka. It was the location where Sita was held captive by Ravana after her abduction. It was destroyed by Hanuman, when he first

visited Lanka, searching for Sita. Its present location is believed to be the Hakgala Botanical Garden, the area is known as Seetha Eliya.

d) This committee also claim that they have found the the Ravan Palace between many tunnels.

These tunnels prove beyond doubt the architectural brilliance of King Ravana. These tunnels served as a quick means of transport through the hills and also as a secret passage and networked all the important cities, airports and dairy farms. A close look at these tunnels

indicates that they are man-made and not natural formations. This Buddhist shrine at Kalutara was where once King Ravana’s palace and a tunnel existed.

2. Cobra Hooded Cave , Sigiriya- There is a distinct link between Sita and the cave and it the following is inscribed,

‘Parumaka naguliya lene’. It would have been inscribed after Rawana’s period but positively it has a connection to Sita’s stay in this cave, as the word ‘naguliya’ refers to Sita.

3. Ritigala in the Anuradhapura District, it connects to Ramayana where Hanuman is sent to the Himalayas to fetch medicinal herb to treat the injured Lakshmana. However, the mountain fragment slipped and fell while Hanuman was over Lanka, and it broke into pieces. These landed in different locations, one of which was Ritigala. This mountain of mystery is said to have most rare medicinal herbs and plants from Himalayas on its summit.


4. In Valmiki’s version of Ramayana, he indicates how hot-springs were built by Ravana to supply naturally hot water in Lanka. These natural hot springs are an integral part of Sri Lanka even today.

5. In search of Seeta, Vanaras went to the east. Sugreeve told them to search for Seeta to the end of the east, which is demarcated by a golden, three branched, Tala tree, which shines from the top to bottom, carved on Uday Mountain. Kishkindha 40/53,54 describes this

Tala tree having three branches. Valmiki wrote this true fact around 5000 years BC, and after 1965 AD such a three branched tree was discovered in the South America, on an offshoot of Mount Andes, near the Bay of Pisco. It is 820 feet tall, has three branches and it glitters like

gold, when seen from the sky. Does this discovery not prove the Ramayana, authored by Valmiki, as true history? 

6. Presence of ram setu- NASA shared some images of adam’s bridge claiming that it was man made but later they denied it. Few months later it was shown on

discovery channel that it was man made and said to 1.73 million years old. However, research is still going on.

7. Valimiki has given 73 ancestors of Rama and recorded which Prince married which princess. The ancestry of Rama and Seeta both is recorded by Valmiki. It is not so in case of Jesus and Paigambar.

Apart from these proofs, ASI research team in chitrakut, sitamadhi have many proofs that ram sita n laxam stayed there, herbs which can be found on Himalayas only are also found in sri lanka etc.

But, still they point fingers on us wearing a mask of fake secularism. It took 70 years to claim our rights to built one temple. No body asks why kawa is built? What is the proof of its history.

HINDUISM ON GRAVITY 

An apple fall on his head and Newton invented gravity in 1687” This is the story, we have been taught in our school. But is it true?


Well, this might be true for western people. But, the principle and specifications of 

gravitational force is mentioned in our scriptures 5000 years ago.


Forget the veda for a while, even gravitation was preached by many of our rishis way before the newton.

I will discuss everything but before that let us know how modern scientists describe gravity-

Gravity is a force, which depends on the mass of the two bodies and distances between them. This force is responsible for the revolution of planet around earth in a fixed orbit and falling down the objects.

Now lets look how our ancient rishis preached gravitation.

The words gravity and gravitational pull are generally translated into Indian languages as “GURUTVA AKARSHANA SHAKTI”. The word ‘Gurutva’ means ‘mass’ and ‘Aakarshana’ means ‘attractive pull’. The very name indicates that the ancient Indians observed some relation between themass of a body and the gravitational pull. The centre of the gravitational force is the centre of earth itself.


Hindu dharma is mainly represented by six philosophies Among the six school of philosophy, Vaishesika is one of them. Vaisheshika philosophy was founded by Maharsi Kanada. Vaishesika philosophy is concised by Vaishesika Sutra. 

Vaishesika Sutra are very old texts. Even the western indologists date it to older than 500 BCE. And Vaisheshika Sutra clearly discuss about Gravity in the Sutras themselves.

However, rishi kanada who lived in 6th century BCE, himself wrote few of the sloka of Vaishesika Sutra, regarding the gravitation, which we see today.

Vaishesika Sutra discuss about role of Gravity in mainly two events:

1) Why does an object held fall when you let go?


आत्मकर्म हस्तसंयोगाश्च । (V.S. 5.1.6)
Action of body and it’s members is also from conjunction with the hand.

संयोगभावे गुरुत्वात्पतनम (V.S. 5.1.7) 
In the absence of conjunction falling results from Gravity.


2) Why does an object thrown in air fall after sometime?

नोदनाद्यभिषोः कर्म तत्कर्मकारिताच्च 

संस्कारादुत्तरं तथोत्तरमुत्तरं च ।। (V.S 5.1.17)


The first action of arrow is from impulse; the next is resultant energy produced by the first action, and similarly the next next sloka


संस्काराभावे गुरुत्वात्पतनम (V.S. 5.1.18)

In the absence of resultant/propulsive energy generated by action, falling results from Gravity.

Rishi Varāhamihira who also supposed to be lived in 5th century BCE, mentioned the following shloka in his Surya Sidhanta 12th chapter 32 sloka-


मध्ये समन्तादण्डस्य भूगोलो व्योम्नि तिष्ठति ।
बिभ्राणः परमां शक्तिं ब्रह्मणो धारणात्मिकाम् ॥



This means: The spherical earth stands at the centre of earth in space due to a ENERGY which prevents earth from falling away and helps it to stand firm.

But what is that energy?

This term ‘energy’ was further defined in following shloka by Bhaskaracharya, a mathematician who lived in 12th century AD. In his book Sidhanta Shiromani, Bhaskaracharya had explained that energy and named it as gurutvakarshan shakti.

आकृष्टिशक्तिश्च महि तय यत्।
खष्ठं गुरु स्वभिमुखं स्वशक्त्या ॥
आकृष्यते तत्पततीव भाति।
समेसमन्तात् क्व पतत्वियं खे ॥



The meaning is that the energy within the ball of earth is aakrushti shakti “attraction”. Because of this attractive force, the earth pulls a piece of

any thing in/on her(svastham) towards herself and this power is her own and natural to her. Because of this pull, every object on this earth appears to be falling down. Bhaskara did not stop here. He concludes the Sloka with the question, where can this earth fall down in space?

Also, Aryabhatta says in his text gitikapada, shloka 7 mentioned that , just as the smaller flowers of the Kadamba flower are tied to the center of the cluster, all the water living, the surface living and the sky living creatures are tied to the center of the earth.

By this poetic expression, Aryabhatta of the 5th century AD, indicates that the center of gravity of the earth is at her own centre.

Apart from these several mantra in different veda states about the gravitational force.

Rigveda 8.12.28

यदा ते हर्यता हरी वावृधाते दिवेदिवे Ι
आदित् ते विश्वा भुवनानि येमिरे ΙΙ       

“All planets remain stable because as they come closer to sun due to attraction, their speed of coming closer increases proportionately.”

Rigveda 8.12.30


यदा सूर्यममुं दिवि शुक्रं ज्योतिरधारय∶Ι 
आदित् ते विश्वा भुवनानि येमिरे ΙΙ  


O God! You have created this Sun which posses infinite power. You are uploading the Sun and the other spheres(planets) and you render them steadfast by your power of attraction.

Rigveda 1.35.9
हिरण्यपाणि∶ सविता विचर्षणिरुभे द्यावापृथिवी अन्तरीयते Ι
अपामीवां बाधते वेति सूर्यमभि कृष्णेन रजसा द्यामृणोति ΙΙ  


Sun orbit in its orbit, holding earth and other heavenly bodies in such a manner that they do not collide with each other by force of attraction.

Atharvaveda 4.11.1
अनड्वान् दाधार पृथिवीमुत द्यामनड्वान् दाधारोर्वन्तरिक्षम् Ι
अनड्वान् दाधार प्रदिश∶ षडुवीर्रनड्वान् विश्वंभुवनमाविवेश ΙΙ  


God(Sun) has held the Earth and other planets, the way a bull pulls a cart. 


The Taittiriya branch of Krishna Yajurveda says –

मित्रोदाधार पृथिवीमुतद्याम । मित्रः कृष्टी: ।

This means, the sun is holding the earth in the space. The sun has the power of attraction (kristheeh) and shines without interruption. The word “Kristhee” in the above sentence is derived from the root “krish” which has no other

meaning, but attraction. Saying that the sun is holding the earth in the space through his power of attraction, implies that the earth also is a body with a different type of force of attraction.

Unfortunately the tender plant of Vedic knowledge, which was

resprouting during the days of medieval periods, faced several more deadly blows during the subsequent periods of history. As a result of this, we are deprived of that meager treasure also.